aaj 12 Aug ko beti Mansi ka Janmdin hai..aaj beti 13 Varsh ki ho gai..Yah 8th class me study krti hai..bahut hi samvedansheel Mansi ne ab tak 6 baal kahaniyan bhi likhi hai...iski Dance me bahut ruchi hai....Mansi ne Dance me khoob saare Inaam jeete hain...Meri hardik shubhkamnayen..ashirwaad.www.mansikidunia.blogspot.com
Sunday, August 12, 2012
Thursday, July 12, 2012
दिनचर्या / दीनदयाल शर्मा
दिनचर्या
स्कूल से आते ही
सात वर्षीय सोनू
बैठ जाता है
घर की मुंडेर पर
और देखता रहता है
मम्मी पापा के आने तक
आते - जाते लोगों को..
अँधेरा होने तक
अपने कमरे में
"होम वर्क " करता - करता
वह थक जाता है
तो टी.वी.
और विडिओगेम में
व्यस्त हो जाता है...
इसी बीच
वह खाना खाता है
दूध पीता है
और सो जाता है...
सुबह मम्मी पापा चले जाते हैं
अपनी - अपनी ड्यूटी
और सोनू बस की
खिड़की के
पास वाली
सीट पर बैठ कर ...
इधर उधर
भागते लोगों को निहारता
पहुँच जाता है अपने स्कूल ..
और शाम को
स्कूल से आते ही वह
बैठ जाता है
घर की मुंडेर पर...
और देखता रहता है
मम्मी पापा के आने तक
आते - जाते लोगों को..
- दीनदयाल शर्मा
29 मार्च 2009 .. गणगौर पर्व पर लिखी कविता
...मेरी डायरी के पन्नों से..
स्कूल से आते ही
सात वर्षीय सोनू
बैठ जाता है
घर की मुंडेर पर
और देखता रहता है
मम्मी पापा के आने तक
आते - जाते लोगों को..
अँधेरा होने तक
अपने कमरे में
"होम वर्क " करता - करता
वह थक जाता है
तो टी.वी.
और विडिओगेम में
व्यस्त हो जाता है...
इसी बीच
वह खाना खाता है
दूध पीता है
और सो जाता है...
सुबह मम्मी पापा चले जाते हैं
अपनी - अपनी ड्यूटी
और सोनू बस की
खिड़की के
पास वाली
सीट पर बैठ कर ...
इधर उधर
भागते लोगों को निहारता
पहुँच जाता है अपने स्कूल ..
और शाम को
स्कूल से आते ही वह
बैठ जाता है
घर की मुंडेर पर...
और देखता रहता है
मम्मी पापा के आने तक
आते - जाते लोगों को..
- दीनदयाल शर्मा
29 मार्च 2009 .. गणगौर पर्व पर लिखी कविता
...मेरी डायरी के पन्नों से..
Sunday, May 20, 2012
मासूम सवाल
जब भी बाँधता हूँ.
तश्में जूतों के
बेटी मानसी
आ जाती है नज़दीक
कभी दबे पांव
तो कभी भाग कर
पापा, बाज़ार से
क्या लाओगे मेरे लिए.?
तुम बताओ क्या लाऊं
प्रत्त्युत्तर में
उसी से करता हूँ सवाल
और लाड करता हुआ
बांहों में
भर लेता हूँ उसे..
वह कहती -
केला, सेब, चीकू , पपीता, अनार
और काले वाले अंगूर भी..
अनार ज़रूर लाना पापा
भूल मत जाना
में अक्सर भूल जाता हूँ
दुकान बंद थी बेटा
कह कर
काम में व्यस्त हो जाता हूँ
सुनकर वह भी
हो जाती चुप
और चली जाती खेलने बाहर
सखी सहेलियों के संग..
कई बार
सब्जी वाले की दुकान पर
जब भी
रुकता हूँ
मानसी की मांग
बार - बार गूंजती है
कानों में
फिर एक - एक चीज के
भाव पूछता हूँ..
दो एक चीज
तुलवा लेता हूँ
महंगाई की मार से
अनार फिर रह जाता है
अनार नहीं लाये पापा ?
कानों में टकराता है
मासूम सा एक सवाल
दुकान पर था ही नहीं बेटा
सहज ही कह जाता हूँ
अब तो
हिचकता भी नहीं हूँ
आदत जो हो गई है
पर अकेला बैठा
कई बात सोचता हूँ
कि अब
जब भी बाहर जाऊंगा
मानसी के लिए
अनार जरूर लाऊंगा
पर भीतर ही भीतर
मन कचोटता है
अपने आप को
तराजू पर तोलता है
कि सच का हामी
आखिर
झूठ क्यों बोलता है..?
-दीनदयाल शर्मा
11 - 3 - 2005 को एस. आर . सी. जयपुर में लिखी कविता..
शाम : 4 :00 बजे..मेरी डायरी के पन्नों से
Wednesday, May 9, 2012
Monday, May 7, 2012
Saturday, May 5, 2012
Saturday, April 14, 2012
dadhi rakhoon ya nahin..? ek sujhaw apse..
dadhi rakhoon ya nahin..Pls. guide me..
apka sujhaw mera nirnya hoga..Thanks.
दाढ़ी के बारे में एक दोस्त ने सलाह देते हुए कहा....भाई, मेरी तो ये सलाह है कि '' रखो तो तुम्हारी मर्जी..और ना रखो तो तुम्हारी मर्जी..''. मैंने दोस्त से सलाह मांगी थी...मुझे दोस्त का सुझाव समझ में नहीं आया ...अब आप ही बताएं कि मेरा दोस्त जो सुझाव दे रहा है..वो आपके समझ में आ गया क्या..?
Tuesday, April 10, 2012
Govt. Sec.School, Jandawali (Hanumangarh) Class 10th, Vidaai Samaroh 2011-2012
बैठी हुई छात्राएं - ज्योति, नवल दीप कौर . निर्मला , सीमा , कांता , गगनदीप कौर, पूनम , किरणदीप , प्रियंका , पूजा , कुर्सियों पर बैठे हुए..श्री जगरूप सिंह , शिक्षक, श्री दीनदयाल शर्मा, पुस्तकालय अध्यक्ष एवं बाल साहित्यकार, श्री कुलदीप सिंह , पंजाबी शिक्षक, श्री रमेश कुमार धानका, श्री महावीर प्रसाद फगोडिया, श्री सेवक राम गर्ग, श्री ॐ प्रकाश पराल, प्रधानाद्यायापक , श्रीमती अनीता गुप्ता, वरिष्ठ शिक्षक (विज्ञानं ), श्रीमती बलविन्द्र कौर , वरिष्ठ शिक्षक (अंग्रेजी ), श्रीमती मधुबाला शर्मा, वरिष्ठ शिक्षक (संस्कृत ), श्रीमती सुनीला , वरिष्ठ शिक्षक , श्रीमती आशा रानी , खड़े हुए विद्यार्थी - सुख राम, प्रेम पाल, धर्म पाल , माणक चन्द, लाल चन्द , पवन कुमार, सुरेंद्र कुमार, हरजिन्द्र सिंह, दिनेश कुमार, महेंद्र कुमार, श्रीमती नसीप कौर , सहायक कर्मचारी , श्रीमती गीता, सहायक कर्मचारी ,
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