Sunday, May 12, 2013
Friday, May 3, 2013
Wednesday, April 24, 2013
Friday, March 29, 2013
दीनदयाल शर्मा पुरस्कृत
Sunday, February 24, 2013
ईसा ने कहा था / दीनदयाल शर्मा
ईसा ने कहा था
ईसा ने कहा था .....
वे नहीं जानते वे क्या कर रहे हैं
उन्हें माफ़ कर देना
वे नहीं जानते वे क्या कर रहे हैं
उन्हें माफ़ कर देना
लेकिन हम
जानकार भी अनजान हैं..
हमारे सामने
कितना कुछ घटता है
हम मौन हैं
अपने काम में मस्त हैं
किसी से कोई लेना देना नहीं है
जीवन इसका नाम तो नहीं..
जानकार भी अनजान हैं..
हमारे सामने
कितना कुछ घटता है
हम मौन हैं
अपने काम में मस्त हैं
किसी से कोई लेना देना नहीं है
जीवन इसका नाम तो नहीं..
हम केवल खुद के लिए जीते हैं
और दूसरों से उम्मीदें रखते हैं
जबकि पशु भी
दूसरों की मदद करते हैं..
और दूसरों से उम्मीदें रखते हैं
जबकि पशु भी
दूसरों की मदद करते हैं..
हम खुद दोषी हैं..
तभी तो
हम भीड़ में भी अकेले हैं
अपने आप को
सभ्य कहलाने का
दंभ भरते हैं..
गलत को गलत
और सही को सही
कहने से डरते हैं..
तभी तो
हम भीड़ में भी अकेले हैं
अपने आप को
सभ्य कहलाने का
दंभ भरते हैं..
गलत को गलत
और सही को सही
कहने से डरते हैं..
हमें खुद सोचना होगा.
कि हम
जानकर भी अनजान
कब तक बने रहेंगे..
और खुद के लिए ही
कब तक जीते रहेंगे..?
-दीनदयाल शर्मा
कि हम
जानकर भी अनजान
कब तक बने रहेंगे..
और खुद के लिए ही
कब तक जीते रहेंगे..?
-दीनदयाल शर्मा
24 . 05 .2012
टाइम : 11 :06 PM
09414514666, 09509542303
टाइम : 11 :06 PM
09414514666, 09509542303
Sunday, December 30, 2012
म्हारे मन री पीड़ा
म्हारे मन री पीड़ा
जीणौ चां'ती दामणी,
गई मौत सूं हार।
जीत दरिंदा री हुई,
मिनखपणौ लाचार।।
देख बुराई सामणै,
नां तूं निजरां फेर।
गळौ पकड़ले गरजगे,
इण में नां कर देर।।
गैंगरेप सूं भरया पड़्या,
दुनिया रा अखबार।
घर बैठ्या अफसोस करो
बारै निकळो यार।।
दिल्ली में हुई दामणी,
दरिन्दगी री शिकार।
सूत्या साहिबा सौड़ में,
अब तो जागो यार।।
घणौ करयो बण सामणौ,
पछै हुई लाचार।
मरग्यौ दीखै मानखो,
मिनख तन्नै धिक्कार।।
बीच बजारां लूट ली
अस्मत,, आपां मून।
गई बिच्यारी दामणी,
कद बणसी कानून।।
- दीनदयाल शर्मा
अध्यक्ष, राजस्थान साहित्य परिषद्,
हनुमानगढ़ जंक्शन- 335512
मो. 09509542303, 09414514666Sunday, December 23, 2012
'रीत अर प्रीत' का लोकार्पण
कवि दीनदयाल शर्मा की राजस्थानी काव्य कृति 'रीत अर प्रीत' का लोकार्पण
हनुमानगढ़। राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर और सृजन सेवा संस्थान, श्रीगंगानगर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पंचायती धर्मशाला, श्रीगंगानगर में शनिवार को संभागीय समारोह में कवि दीनदयाल शर्मा ·की सद्य प्रकाशित राजस्थानी काव्य कृति 'रीत अर प्रीत' का लोकार्पण हुआ। लोकार्पण में वरिष्ठ ·कवि मोहन आलोक , राजस्थानी अकादमी अध्यक्ष श्याम महर्षि, महाजन के डॉ.मदन गोपाल लढ़ा, संगरिया के गोविन्द शर्मा, पीलीबंगा के निशान्त आदि ने लोकार्पण करते हुए दीनदयाल शर्मा को बधाई दी। इस अवसर पर दीनदयाल शर्मा ने लोकार्पित काव्य कृति 'रीत अर प्रीत' से 'मा' और शीर्षक कविता 'रीत अर प्रीत' का वाचन किया । उल्लेखनीय है कि यह काव्य कृति राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर की पाण्डुलिपि प्रकाशन योजना के अंतर्गत बोधि प्रकाशन , जयपुर द्वारा दिसम्बर, 2012 में प्रकाशित की गई है। श्री शर्मा हाल ही साहित्य अकादेमी दिल्ली से पुरस्कृत होने के साथ साथ अनेक संस्थाओं से पुरस्कृत हो चुके है। इनकी हिंदी , राजस्थानी , पंजाबी और अंग्रजी सहित अब तक लगभग तीन दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
Wednesday, December 12, 2012
'सूरज एक सितारा है' का लोकार्पण
बच्चों ने किया दीनदयाल शर्मा की पुस्तक का लोकार्पणहनुमानगढ़। जंक्शन स्थित नेशनल पब्लिक स्कूल प्रांगण में आज सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार दीनदयाल शर्मा की सद्य प्रकाशित बाल काव्य कृति 'सूरज एक सितारा है' का लोकार्पण हुआ। ये लोकार्पण इसी विद्यालय की छात्रा कस्तूरी मिश्रा और किंजल कटारिया ने किया। कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य सचिन कुमार कुक्कड़ ने कहा कि आज के समय बच्चे बाल साहित्य के पठन से कटते जा रहे हैं। उन्हें साहित्य से जोड़े रखना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए अनुकूल बाल साहित्य का सृजन करना बेहद जटिल साधना है लेकिन बाल साहित्यकार दीनदयाल शर्मा बच्चों के लिए सरल और सहज रचनाएं दे रहे हैं। सचिन कुमार ने कहा कि बच्चों को बाल साहित्य सृजन सिखाने के लिए समय-समय पर कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिएं। उन्होंने अपने विद्यालय में बच्चों से निकट भविष्य में बाल साहित्य सृजन के लिए कार्यशाला आयोजित करने का आश्वासन दिया। दीनदयाल शर्मा ने लोकार्पित कृति से बाल मन की कविताएं सुनाईं। इस अवसर पर उप प्राचार्या तेज कुमार, श्रीमती गुलशन ग्रोवर, प्रवीण मेहन व मस्तान सिंह मौजूद थे।
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Friday, November 30, 2012
राष्ट्रपति से मिले साहित्यकारों में हनुमानगढ़ के दीनदयाल शर्मा भी....
बच्चों के लिए अच्छे लेखन के पक्षधर हैं प्रणव दाहनुमानगढ़। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी बच्चों के लिए अच्छा लेखन करने के पक्षधर हैं। हाल में नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में राजस्थान के बाल साहित्यकारों से खास मुलाकात में प्रणव दा ने यह आवश्यकता प्रतिपादित की। बच्चों के लिए लिखने वाले इन साहित्यकारों से मिलकर राष्ट्रपति बहुत खुश हुए। राष्ट्रपति से मिले साहित्यकारों में हनुमानगढ़ के दीनदयाल शर्मा भी शामिल थे। शर्मा राजस्थान के संभवत: ऐसे एक मात्र साहित्यकार हैं, जो अब तक तीन राष्ट्रपतियों एपीजे अब्दुल कलाम, प्रतिभा पाटिल तथा प्रणव मुखर्जी से मुलाकात करने का सौभाग्य पा चुके हैं। प्रणब दा से मुलाकात कैसी रही, आज हनुमानगढ़ लाइव कॉम से खास बातचीत में उन्होंने इसका खुलासा किया। शर्मा के अनुसार राष्ट्रपति ने बच्चों के लिए लेखन को बहुत अच्छा काम बताया तथा कहा कि यह काम और अच्छा होना चाहिए क्योंकि बच्चे जो कुछ पढ़ते हैं, वह उनके भविष्य के साथ जुड़ जाता है। दीनदयाल शर्मा ने बताया कि प्रणव दा से मिलने का उनका अनुभव बहुत बड़ा रहा। वे देश के प्रथम नागरिक हैं और उतने ही विनम्र भी। वे राज्य के साहित्यकारों से ऐसे मिले, जैसे उनके परिवार के सदस्य हों। अत्यंत विनम्रता से, उदारता से। प्रणव दा की तरफ से साहित्यकारों को अल्पाहार दिया गया और बाद में करीब पन्द्रह मिनट प्रणव दा ने साहित्यकारों से बातचीत की, उनकी पुस्तकें स्वीकार की और फोटो खिंचवाए। शर्मा ने बताया कि यह उनकी लगातार तीसरे राष्ट्रपति से मुलाकात थी, जो यादगार बन गई। कलाम साहब का उनकी पुस्तक 'द ड्रीम्स' का लोकार्पण करना, प्रतिभा जी का कई घंटों का साथ और प्रवण दा से ताजा मुलाकात ऐसे क्षण हैं, जो अविस्मरणीय हो गए हैं।
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