प्रेम और सत्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं....मोहनदास कर्मचंद गांधी...........मुझे मित्रता की परिभाषा व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मैंने ऐसा मित्र पाया है जो मेरी ख़ामोशी को समझता है

Friday, December 12, 2014

गाय / दीनदयाल शर्मा

हिंदी बाल गीत -

गाय / दीनदयाल शर्मा

सरल सहज सी गाय हमारी,
लगती हमको सबसे प्यारी।

कई रंगों की होती है यह,
गलकंबल की शोभा न्यारी।

सिर्फ दूध ही नहीं देती यह,
घी दही मक्खन देती भारी।

बछड़ा इसका बैल बने तब,
करे खेत की जुताई सारी।

देव करोड़ों का ये घर है,
इसको पूजें मिटे बीमारी।

वैद्य हकीम बतायें सारे,
इसकी सब चीजें गुणकारी।।



Thursday, December 11, 2014

गाय / दीनदयाल शर्मा

हिंदी बाल गीत -

गाय / दीनदयाल शर्मा

सरल सहज सी गाय हमारी,
लगती हमको सबसे प्यारी।

कई रंगों की होती है यह,
गलकंबल की शोभा न्यारी।

सिर्फ दूध ही नहीं देती यह,
घी दही मक्खन देती भारी।

बछड़ा इसका बैल बने तब,
करे खेत की जुताई सारी।

देव करोड़ों का ये घर है,
इसको पूजें मिटे बीमारी।

वैद्य हकीम बतायें सारे,
इसकी सब चीजें गुणकारी।।


कर्म / दीनदयाल शर्मा

हिन्दी बाल गीत -

कर्म / दीनदयाल शर्मा

सर सर सर सर हवाएं बहतीं
झर झर झर बहता झरना

हिम्मत जो रखता है हरदम
उसको किसी से क्या डरना

कड़ कड़ कड़ कड़ बिजली चमके
गड़ गड़ ओलों का गिरना

कायरता कमजोरी होती
उसको पड़ता है मरना

दड़बड़ दड़बड़ बच्चे दौड़े 
जीवन में है कुछ करना

जैसे कर्म करेंगे जग में 
पड़ेगा वैसा ही भरना....

भालू जी / दीनदयाल शर्मा

हिन्दी बाल गीत -

भालू जी / दीनदयाल शर्मा

ढोलक बाजे ढम ढम ढम
नाचे भालू जी छम छम

दो पैरों पर खड़ा हो गया
ता - ता थैया ता तिकड़म

दरख़त पर चढ़ जाए उल्टा
खा के शहद ही लेता दम

लेट जाए धरती पर लटपट
आए न इसको कभी शरम

घने बाल ज्यों ओढ़ा कम्बल 
सरदी का इसको ना ग़म.....

Friday, December 5, 2014

बंदर जी / दीनदयाल शर्मा

हिन्दी बाल कविता-

बंदर जी / दीनदयाल शर्मा

बंदर जी तुम आओ जी,
क्यों इतने घबराओ जी।
तुम्हें देख बच्चे खुश होते,
इनको और हँसाओ जी।
बच्चे यदि तुम्हें छेड़े तो,
इनको खूब डराओ जी।
खाने की कोई चीज तुम्हें देें,
झटपझट से तुम खाओ जी।
चपर-चपर तुम अदरक खाकर,
इसका स्वाद बताओ जी।
धोती-कुर्ता पहन के टोपी,
इतने मत इतराओ जी।
नकल में हो तुम सबसे आगे,
कुछ करके दिखलाओ जी।
सरकस में हो या तुम घर में,
सब के मन को भाओ जी।।

Friday, November 28, 2014

सरदी आई / दीनदयाल शर्मा



सरदी आई / दीनदयाल शर्मा

सरदी आई ठंडक लाई
ओढें कंबल और रजाई 


कोट स्वेटर टोपी मफ़लर
इन सबकी करते भरपाई..


ठंडी चीजें नहीं सुहाती
गरम गरम सबके मन भायी..


नहाने से डरते हम बच्चे
लगता जैसे आफ़त आई..


पंखे कूलर बंद कर दिये
अब हीटर की बारी आई..

गांवों में सब आग तापते
बैठे बैठे करें हथाई..


गज्जक मुंगफली लड्डू खा कर
चाय की प्याली खनकाई..

सूरज निकला धूप सुहाई
गली- गली में रौनक छाई...



Wednesday, November 26, 2014

बातों की फुलवारी



बातों की फुलवारी

सहायक पुस्तक माला 5


यह पुस्तक पांचवीं कक्षा की सहायक पुस्तक के रूप में कई राज्यों में पढ़ाई जाएगी... इसमें मेरा एक संस्मरण प्रकाशित हुआ है...मेरे साथ साथ इसमें देश के जाने माने बाल साहित्यकारों की रचनाएं शामिल की गई हैं....52 पृष्ठों के आर्ट पेपर पर आकर्षक एवं रंगीन चित्रों के साथ रचनाओं को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है..

पुस्तक में कविता, कहानी, नाटक, ग्यान विग्यान, प्राणी जगत, संस्मरण, शब्दार्थ और मूल्यपरक प्रश्न भी दिए गए हैं...संपादक मंडल को बधाई....

मधुबन एज्युकेशनल बुक्स, नोएडा, उ.प्र. का हार्दिक आभार....

पुस्तक स्पीड पोस्ट से आज ही मिली है..






Monday, November 24, 2014

सफाई की सौगंध / दीनदयाल शर्मा

हिन्दी बाल गीत-

सफाई की सौगंध / दीनदयाल शर्मा

आओ हम सब करें सफाई
रलमिल सारे बहना भाई

तन की मन की आस पास की
इधर उधर की आम खास की
जगह जगह जो लग गए जाले
उनकी है अब शामत आई.

गर हम सारे रखें सफाई
कण कण की यदि करें धुलाई
फिर सारे नीरोग रहेंगे
बीमारी में लगे न पाई..

पहला सुख नीरोगी काया
विद्वानों ने बात बताई
नित्य कर्म से जोड़ेंगे नाता
सबने मिल सौगंध है खाई..

- दीनदयाल शर्मा, 
बाल साहित्यकार

Friday, November 21, 2014

21 November 2014.World TV day


एक पहेली  / दीनदयाल शर्मा 

फ़िल्में, गीत, ख़बर और नाटक
रोज़ हमें दिखलाता ।
सीसे का छोटा सा बक्सा,
बोलो क्या कहलाता ?


Wednesday, November 19, 2014

शिक्षा की ताकत / दीनदयाल शर्मा

हिंदी बाल कविता -

शिक्षा की ताकत / दीनदयाल शर्मा

टन टन टन जब बजे तो घंटी
भागे दौड़े जाएं स्कूल
दड़बड़ दड़बड़ सब भागें तो
उड़ती जाए गली की धूल

कंप्यूटर से करें पढ़ाई ,
नई - नई बातें बतलाई
बस्ता अब कुछ हुआ है हल्का ,
मन भारी था हो गया फुलका .

अब न कोई करे बहाना
रोजाना स्कूल को जाना ,
पढ़ लिख कुछ बनने की ठानी
शिक्षा की ताकत पहचानी..

बच्चे मन के सच्चे / दीनदयाल शर्मा

हिन्दी बाल कविता....

बच्चे मन के सच्चे  / दीनदयाल शर्मा 

खट खट खट खट कटती लकड़ी 
आठ पैर की होती मकड़ी..

थप थप थप थप देती थपकी 
घोड़ा खड़ा खड़ा ले झपकी..

चट पट चट पट चने चबाए,
बकरी में में कर मिमियाए 

टर टर टर टर मेंढक करता 
चूहा बिल्ली से है डरता..

खट खट खट खट बजते बूट 
बिन जूतों के फिरते ऊँट ..

खड़ खड़ खड़ खड़ होता शोर.
बादल देख के नाचा  मोर..

छट पट छट पट बरखा आए
कागज की सब नाव चलाए..

दड़ बड़ दड़ बड़ भागे बच्चे 
मन से निर्मल होते सच्चे ...

बाल दिवस / दीनदयाल शर्मा

हिन्दी बाल कविता....

बाल दिवस / दीनदयाल शर्मा 

मां स्वरूपरानी थी जिनकी 
पिता थे मोतीलाल 
इलाहाबाद में जन्मे थे जो 
नाम जवाहरलाल 

मुंशी मुबारक अली सुनाते 
इनको रोज कहानी, 
अठारह सौ सत्तावन ग़दर के 
किस्से इन्हें ज़ुबानी 

प्राथमिक शिक्षा घर में दिलाई 
फिर भेजा परदेश
शिक्षा पूरी कर लौटे वे 
फिर भारत स्वदेश 

अंग्रेजों के अत्याचार से 
व्यथित भारतवासी 
राजद्रोही आरोप में जवाहर 
बने जेल प्रवासी 

पंद्रह अगस्त सैंतालिस के दिन 
हुआ देश आज़ाद 
तोड़ गुलामी की जंजीरें 
फिर से हुआ आबाद.

बच्चों के प्यारे चाचा तुम 
याद सभी को आते. 
चौदह नवंबर के दिन उत्सव 
रलमिल सभी मनाते..

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