प्रेम और सत्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं....मोहनदास कर्मचंद गांधी...........मुझे मित्रता की परिभाषा व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मैंने ऐसा मित्र पाया है जो मेरी ख़ामोशी को समझता है

Monday, April 6, 2015

शेर / दीनदयाल शर्मा



शिशु गीत -


शेर / दीनदयाल शर्मा

शेर दहाड़ा खूब जोर से
अपना बल दिखलाया।
सुनी दहाड़ सब जीवों ने, तब
सबका दिल घबराया।


थर-थर लगे कांपने सारे,
सामने कोई न आया।
अपनी ताकत के बल पर, वह
वन राजा कहलाया।।

चँदा मामा / दीनदयाल शर्मा



शिशु गीत -

चँदा मामा / दीनदयाल शर्मा

आसमान में दिखते हो तुम,
रात को चँदा मामा। 
घटते-बढ़ते रहते हो तुम, 
क्यूँ करते हो ड्रामा। 


सूरज कभी न घटता-बढ़ता,
सदा एकसा रहता।
तुम भी सूरज बन जाओ ना,
मेरे प्यारे मामा।।




Tuesday, March 24, 2015

बंदर को भायी बिल्ली / दीनदयाल शर्मा

हास्य बाल कविता-

बंदर को भायी बिल्ली / दीनदयाल शर्मा


बिल्ली को देखा बंदर ने
मन में उसके भायी
सोचा गर इससे हो जाए
झट से मेरी सगाई।

बंदर ने मम्मी-पापा से
उसकी बात चलाई
मेरी शादी कर दो उससे
बिल्ली मुझको भायी।

बंदर के मम्मी-पापा जब
पहुंचे बिल्ली के घर
बिल्ली पहले से ब्याही है
बोला उनका नौकर।।

Sunday, March 22, 2015

My Birthday

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी गणगौर की तीज को मेरा जन्मदिन My Birthday... है...





Friday, March 20, 2015

आज चिड़िया दिवस पर मेरी एक कविता...

ओ चिड़िया / दीनदयाल शर्मा

ओ चिड़िया तुम कितनी प्यारी ।
साधारण-सी शक्ल तुम्हारी ।। 
चीं-चीं कर आँगन में आतीं ।
सब बच्चों के मन को भातीं ।।
भोली और लगतीं मासूम ।
जी करता तुमको लूँ चूम ।।
भाँति-भाँति के न्यारे-न्यारे ।
जीव-जंतु जहाँ रहते हैं सारे ।।
घर उनका हम सबको भाए ।
तभी तो चिडिय़ाघर कहलाए ।।

Saturday, February 21, 2015

बेटी ऋतुप्रिया और हरीश जी के विवाह की तीसरी वर्ष गांठ

23  फ़रवरी  2015 को बेटी ऋतुप्रिया और हरीश जी के विवाह की तीसरी वर्ष गांठ पर हार्दिक शुभकामनायें....

Sunday, January 4, 2015

सरदी आई / दीनदयाल शर्मा

सरदी आई / दीनदयाल शर्मा

सरदी आई ठंडक लाई
ओढें कंबल और रजाई

कोट स्वेटर टोपी मफ़लर
इन सबकी करते भरपाई..

ठंडी चीजें नहीं सुहाती
गरम गरम सबके मन भायी..

नहाने से डरते हम बच्चे
लगता जैसे आफ़त आई..

पंखे कूलर बंद कर दिये
अब हीटर की बारी आई..

गांवों में सब आग तापते
बैठे बैठे करें हथाई..

गज्जक मुंगफली लड्डू खा कर
चाय की प्याली खनकाई..

सूरज निकला धूप सुहाई
गली- गली में रौनक छाई...


Friday, December 12, 2014

गाय / दीनदयाल शर्मा

हिंदी बाल गीत -

गाय / दीनदयाल शर्मा

सरल सहज सी गाय हमारी,
लगती हमको सबसे प्यारी।

कई रंगों की होती है यह,
गलकंबल की शोभा न्यारी।

सिर्फ दूध ही नहीं देती यह,
घी दही मक्खन देती भारी।

बछड़ा इसका बैल बने तब,
करे खेत की जुताई सारी।

देव करोड़ों का ये घर है,
इसको पूजें मिटे बीमारी।

वैद्य हकीम बतायें सारे,
इसकी सब चीजें गुणकारी।।



Thursday, December 11, 2014

गाय / दीनदयाल शर्मा

हिंदी बाल गीत -

गाय / दीनदयाल शर्मा

सरल सहज सी गाय हमारी,
लगती हमको सबसे प्यारी।

कई रंगों की होती है यह,
गलकंबल की शोभा न्यारी।

सिर्फ दूध ही नहीं देती यह,
घी दही मक्खन देती भारी।

बछड़ा इसका बैल बने तब,
करे खेत की जुताई सारी।

देव करोड़ों का ये घर है,
इसको पूजें मिटे बीमारी।

वैद्य हकीम बतायें सारे,
इसकी सब चीजें गुणकारी।।


कर्म / दीनदयाल शर्मा

हिन्दी बाल गीत -

कर्म / दीनदयाल शर्मा

सर सर सर सर हवाएं बहतीं
झर झर झर बहता झरना

हिम्मत जो रखता है हरदम
उसको किसी से क्या डरना

कड़ कड़ कड़ कड़ बिजली चमके
गड़ गड़ ओलों का गिरना

कायरता कमजोरी होती
उसको पड़ता है मरना

दड़बड़ दड़बड़ बच्चे दौड़े 
जीवन में है कुछ करना

जैसे कर्म करेंगे जग में 
पड़ेगा वैसा ही भरना....

भालू जी / दीनदयाल शर्मा

हिन्दी बाल गीत -

भालू जी / दीनदयाल शर्मा

ढोलक बाजे ढम ढम ढम
नाचे भालू जी छम छम

दो पैरों पर खड़ा हो गया
ता - ता थैया ता तिकड़म

दरख़त पर चढ़ जाए उल्टा
खा के शहद ही लेता दम

लेट जाए धरती पर लटपट
आए न इसको कभी शरम

घने बाल ज्यों ओढ़ा कम्बल 
सरदी का इसको ना ग़म.....

Friday, December 5, 2014

बंदर जी / दीनदयाल शर्मा

हिन्दी बाल कविता-

बंदर जी / दीनदयाल शर्मा

बंदर जी तुम आओ जी,
क्यों इतने घबराओ जी।
तुम्हें देख बच्चे खुश होते,
इनको और हँसाओ जी।
बच्चे यदि तुम्हें छेड़े तो,
इनको खूब डराओ जी।
खाने की कोई चीज तुम्हें देें,
झटपझट से तुम खाओ जी।
चपर-चपर तुम अदरक खाकर,
इसका स्वाद बताओ जी।
धोती-कुर्ता पहन के टोपी,
इतने मत इतराओ जी।
नकल में हो तुम सबसे आगे,
कुछ करके दिखलाओ जी।
सरकस में हो या तुम घर में,
सब के मन को भाओ जी।।

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