प्रेम और सत्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं....मोहनदास कर्मचंद गांधी...........मुझे मित्रता की परिभाषा व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मैंने ऐसा मित्र पाया है जो मेरी ख़ामोशी को समझता है

Tuesday, June 14, 2016

बारिश का मौसम / दीनदयाल शर्मा

बारिश का मौसम है आया ।
हम बच्चों के मन को भाया ।।

'छु' हो गई गरमी सारी ।
मारें हम मिलकर किलकारी ।।

काग़ज़ की हम नाव चलाएँ ।
छप-छप नाचें और नचाएँ ।।

मज़ा आ गया तगड़ा भारी ।
आँखों में आ गई खुमारी ।।

गरम पकौड़ी मिलकर खाएँ ।
चना चबीना खूब चबाएँ ।।

गरम चाय की चुस्की प्यारी ।
मिट गई मन की ख़ुश्की सारी ।।

बारिश का हम लुत्फ़ उठाएँ ।
सब मिलकर बच्चे बन जाएँ ।।

Monday, October 19, 2015

Sunday, July 5, 2015

ऋतुप्रिया की कविताओं का अनुवाद

केन्द्रीय साहित्य अकादेमी से युवा पुरस्कार के लिए चयनित ऋतुप्रिया की पुस्तक "सपनां संजोवती हीरां" की दो राजस्थानी कविताओं का हिन्दी अनुवाद डॉ मदन गोपाल लढा द्वारा किया गया।

Thursday, June 18, 2015

फादर्स- डे पर विशेष.........पिताजी / दीनदयाल शर्मा



फादर्स- डे पर विशेष

पिताजी / दीनदयाल शर्मा

पिताजी कहते थे
जल्दी उठो
वे खुद जल्दी उठते थे।

वे कहते थे
मेहनत करो
वे खुद मेहनती थे।

वे कहते थे
सच बोलो
वे खुद सच के हामी थे।

वे कहते थे
ईमानदार रहो
वे खुद ईमानदार थे।

मैं उनके बताए
कदमों पर चला।

आज सब कुछ है
मेरे पास.....
लेकिन पिताजी नहीं है।

-दीनदयाल शर्मा

Thursday, April 23, 2015

विश्व पुस्तक दिवस पर विशेष

विश्व  पुस्तक दिवस पर विशेष -

किताब / दीनदयाल शर्मा 

सुख-दु:ख में साथ, 
निभाती रही किताब।

बुझे मन की बाती, 
जलाती रही किताब।

जब कभी लगी प्यास,
बुझाती रही किताब।

मन जब हुआ उदास,
हँसाती रही किताब।

अंधेरे में भी राह,
दिखाती रही किताब।

अनगिनत खुशियां,
लुटाती रही किताब॥












Monday, April 6, 2015

शेर / दीनदयाल शर्मा



शिशु गीत -


शेर / दीनदयाल शर्मा

शेर दहाड़ा खूब जोर से
अपना बल दिखलाया।
सुनी दहाड़ सब जीवों ने, तब
सबका दिल घबराया।


थर-थर लगे कांपने सारे,
सामने कोई न आया।
अपनी ताकत के बल पर, वह
वन राजा कहलाया।।

चँदा मामा / दीनदयाल शर्मा



शिशु गीत -

चँदा मामा / दीनदयाल शर्मा

आसमान में दिखते हो तुम,
रात को चँदा मामा। 
घटते-बढ़ते रहते हो तुम, 
क्यूँ करते हो ड्रामा। 


सूरज कभी न घटता-बढ़ता,
सदा एकसा रहता।
तुम भी सूरज बन जाओ ना,
मेरे प्यारे मामा।।




Tuesday, March 24, 2015

बंदर को भायी बिल्ली / दीनदयाल शर्मा

हास्य बाल कविता-

बंदर को भायी बिल्ली / दीनदयाल शर्मा


बिल्ली को देखा बंदर ने
मन में उसके भायी
सोचा गर इससे हो जाए
झट से मेरी सगाई।

बंदर ने मम्मी-पापा से
उसकी बात चलाई
मेरी शादी कर दो उससे
बिल्ली मुझको भायी।

बंदर के मम्मी-पापा जब
पहुंचे बिल्ली के घर
बिल्ली पहले से ब्याही है
बोला उनका नौकर।।

Sunday, March 22, 2015

My Birthday

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी गणगौर की तीज को मेरा जन्मदिन My Birthday... है...





Friday, March 20, 2015

आज चिड़िया दिवस पर मेरी एक कविता...

ओ चिड़िया / दीनदयाल शर्मा

ओ चिड़िया तुम कितनी प्यारी ।
साधारण-सी शक्ल तुम्हारी ।। 
चीं-चीं कर आँगन में आतीं ।
सब बच्चों के मन को भातीं ।।
भोली और लगतीं मासूम ।
जी करता तुमको लूँ चूम ।।
भाँति-भाँति के न्यारे-न्यारे ।
जीव-जंतु जहाँ रहते हैं सारे ।।
घर उनका हम सबको भाए ।
तभी तो चिडिय़ाघर कहलाए ।।

Saturday, February 21, 2015

बेटी ऋतुप्रिया और हरीश जी के विवाह की तीसरी वर्ष गांठ

23  फ़रवरी  2015 को बेटी ऋतुप्रिया और हरीश जी के विवाह की तीसरी वर्ष गांठ पर हार्दिक शुभकामनायें....

हिन्दी में लिखिए