प्रेम और सत्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं....मोहनदास कर्मचंद गांधी...........मुझे मित्रता की परिभाषा व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मैंने ऐसा मित्र पाया है जो मेरी ख़ामोशी को समझता है

Sunday, May 17, 2026

बाल गीत — ओ है म्हारो राजस्थान (दीनदयाल शर्मा)

 

ओ है म्हारो राजस्थान, 

ईंरो आखै जग में नाम।


राजस्थान री धरती माथै, 

ऊंचा-ऊंचा धोरिया । 

बादळ आवै जद आकासां, 

बोलै मीठा मोरिया ।


ऊंट टोडिया ढाण घालां, 

गावां मीठा गीत जी। 

चूर - चूर ढोकळिया चूरमो, 

गणगौरां री तीज जी।


खेलरी फोफळिया भावै, 

सांगरियां रो साग जी। 

होळी माथै चंग बजावां, 

गावाँ मीठो फाग जी।


बाजरी रा सीट्टा चाबां, 

खावां अड़क मतीरा जी।

टींडसी लोइयां रो तीवण, 

छाछ राबड़ी जीरा जी।


भामासा जेड़ा है दानी, 

आखै राजस्थान में। 

पन्नाधाय जेड़ी है मावां, 

पीछै नीं बलिदान में।


रावणहत्थो ढोल बजावां, 

अळगोजां री तान जी । 

वीरां री धरती है म्हारी, 

पाग मूंछ म्हारी स्यान जी।


ओ है म्हारो राजस्थान, 

ओ है म्हारो राजस्थान ।


ईंरो आखै जग में नाम, 

ईंरो आखै जग में नाम ।।


- दीनदयाल शर्मा, 

टाबर टोल़ी, हनुमानगढ़ राजस्थान

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