प्रेम और सत्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं....मोहनदास कर्मचंद गांधी...........मुझे मित्रता की परिभाषा व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मैंने ऐसा मित्र पाया है जो मेरी ख़ामोशी को समझता है

Sunday, June 15, 2014

फादर्स डे पर विशेष
















फादर्स डे पर विशेष

पिताजी कहते थे
जल्दी उठो
वे खुद जल्दी उठते थे

वे कहते थे
मेहनत करो
वे खुद मेहनती थे

वे कहते थे
सच बोलो
वे खुद सच के हामी थे

वे कहते थे
ईमानदार रहो
वे खुद ईमानदार थे

मैं उनके बताए
क़दमों पर चला

आज सब कुछ है
मेरे पास .....
लेकिन पिताजी नहीं हैं..

दीनदयाल शर्मा
15 जून 2014 

Wednesday, April 23, 2014

विश्व पुस्तक दिवस पर मेरी एक कविता......





किताब




सुख - दुःख में साथ,

निभाती रही किताब

बुझे मन की बाती,
जलाती रही किताब

जब कभी लगी प्यास,
बुझाती रही किताब

मन जब हुआ उदास,
हँसाती रही किताब

अँधेरे में भी राह,
दिखाती रही किताब

अनगिनत खुशियाँ,
लुटाती रही किताब..

- दीनदयाल शर्मा

Monday, October 14, 2013

रावण

रावण

सालो-साल दशहरा आता
पुतला झट बन जाए।

बँधा हुआ रस्सी से रावण
खड़ा-खड़ा मुस्काए।

चाहे हो तो करे ख़ात्मा,
राम कहाँ से आए।

रूप राम का धरकर कोई,
अग्निबाण चलाए।

धू-धू करके राख हो गया,
नकली रावण हाय!

मिलकर खुशियाँ बाँटें सारे,
नाचें और नचाएँ।

अपने भीतर नहीं झाँकते,
खुद को राम कहाए।

सबके मन में बैठा रावण,
इसको कौन मिटाए।

- दीनदयाल शर्मा

Sunday, July 14, 2013

टाबरां री राजस्थानी तिमाही पत्रिका " पारस मणि "





टाबरां री राजस्थानी तिमाही पत्रिका " पारस मणि " प्रथम अंक



पत्रिका पढने के लिए यहाँ क्लिक करें.

Sunday, May 12, 2013

Book Review by Shri Paras Chand Jain, Tonk, Raj.

Reet ar Preet - Deendayal Sharma ri book ro 
Shivira May-June 2013 ank me Review 
by Shri Paras Chand Jain, DEO, Tonk, Rajasthan

Book Review



Reet ar Preet - Deendayal Sharma's book ka Review 
by Shri Naag Raj Sharma, Editor, Binjaaro, Pilani

Friday, May 3, 2013

Friday, March 29, 2013

दीनदयाल शर्मा पुरस्कृत

पुणे। केन्द्रीय साहित्य अकादेमी नई दिल्ली की ओर से बाल साहित्य पुरस्कार   - 2012   और  पुरस्कार वितरण समारोह पुणे (महाराष्ट्र) के  बाल गंधर्व रंग मंदिर के  सभागर में आयोजित किया गया। इसमें राजस्थानी बाल साहित्य  पुरस्कार के  लिए सुप्रसिद्ध वरिष्ठ बाल साहित्यकार दीनदयाल शर्मा को इनकी  राजस्थानी बाल निबंध कृति  'बाळपणै री बातां ' लिए पुरस्कृत  किया  गया।  पुरस्कार वितरण के  दौरान अकादेमी के  सचिव  के.एस.राव ने दीनदयाल शर्मा  के व्यक्तित्व एवं कृतित्व  पर प्रकाश  डाला। सुप्रसिद्ध मराठी  साहित्यकार  एवं मुख्य अतिथि अनिल अवचट ने दीनदयाल शर्मा को  माल्यार्पण की  । तत्पश्चात अकादेमी के  अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने 50,000 की राशि एवं साहित्य अकादेमी का  ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया । उल्लेखनीय है कि  समारोह में देशभर के  अनेक  राज्यों से पधारे 24 भाषाओं के  बाल साहित्यकारों को  पुरस्कृत किया  गया। दूसरे दिन लेखक - पाठक   मिलन समारोह में सम्मानित साहित्यकारों ने सृजन प्रक्रिया एवं जीवन से जुड़े विशेष पहलुओं पर विचार व्यक्त किये  । दो दिवसीय इस पुरस्कार  वितरण समारोह के अंत में अकादेमी  सचिव श्री राव ने सभी का  आभार व्यक्त किया  । 

Sunday, February 24, 2013

ईसा ने कहा था / दीनदयाल शर्मा


ईसा ने कहा था


ईसा ने कहा था .....
वे नहीं जानते वे क्या कर रहे हैं
उन्हें माफ़ कर देना
लेकिन हम
जानकार भी अनजान हैं..
हमारे सामने
कितना कुछ घटता है
हम मौन हैं
अपने काम में मस्त हैं
किसी से कोई लेना देना नहीं है
जीवन इसका नाम तो नहीं..
हम केवल खुद के लिए जीते हैं
और दूसरों से उम्मीदें रखते हैं
जबकि पशु भी
दूसरों की मदद करते हैं..
हम खुद दोषी हैं..
तभी तो
हम भीड़ में भी अकेले हैं
अपने आप को
सभ्य कहलाने का
दंभ भरते हैं..
गलत को गलत
और सही को सही
कहने से डरते हैं..
हमें खुद सोचना होगा.
कि हम
जानकर भी अनजान
कब तक बने रहेंगे..
और खुद के लिए ही
कब तक जीते रहेंगे..?

-दीनदयाल शर्मा
24 . 05 .2012
टाइम : 11 :06 PM
09414514666, 09509542303

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