Sunday, June 15, 2014
Wednesday, April 23, 2014
Wednesday, January 1, 2014
Monday, October 14, 2013
रावण
रावण
सालो-साल दशहरा आता
पुतला झट बन जाए।
बँधा हुआ रस्सी से रावण
खड़ा-खड़ा मुस्काए।
चाहे हो तो करे ख़ात्मा,
राम कहाँ से आए।
रूप राम का धरकर कोई,
अग्निबाण चलाए।
धू-धू करके राख हो गया,
नकली रावण हाय!
मिलकर खुशियाँ बाँटें सारे,
नाचें और नचाएँ।
Sunday, July 14, 2013
टाबरां री राजस्थानी तिमाही पत्रिका " पारस मणि "
टाबरां री राजस्थानी तिमाही पत्रिका " पारस मणि " प्रथम अंक
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Sunday, May 12, 2013
Friday, May 3, 2013
Wednesday, April 24, 2013
Friday, March 29, 2013
दीनदयाल शर्मा पुरस्कृत
Sunday, February 24, 2013
ईसा ने कहा था / दीनदयाल शर्मा
ईसा ने कहा था
ईसा ने कहा था .....
वे नहीं जानते वे क्या कर रहे हैं
उन्हें माफ़ कर देना
वे नहीं जानते वे क्या कर रहे हैं
उन्हें माफ़ कर देना
लेकिन हम
जानकार भी अनजान हैं..
हमारे सामने
कितना कुछ घटता है
हम मौन हैं
अपने काम में मस्त हैं
किसी से कोई लेना देना नहीं है
जीवन इसका नाम तो नहीं..
जानकार भी अनजान हैं..
हमारे सामने
कितना कुछ घटता है
हम मौन हैं
अपने काम में मस्त हैं
किसी से कोई लेना देना नहीं है
जीवन इसका नाम तो नहीं..
हम केवल खुद के लिए जीते हैं
और दूसरों से उम्मीदें रखते हैं
जबकि पशु भी
दूसरों की मदद करते हैं..
और दूसरों से उम्मीदें रखते हैं
जबकि पशु भी
दूसरों की मदद करते हैं..
हम खुद दोषी हैं..
तभी तो
हम भीड़ में भी अकेले हैं
अपने आप को
सभ्य कहलाने का
दंभ भरते हैं..
गलत को गलत
और सही को सही
कहने से डरते हैं..
तभी तो
हम भीड़ में भी अकेले हैं
अपने आप को
सभ्य कहलाने का
दंभ भरते हैं..
गलत को गलत
और सही को सही
कहने से डरते हैं..
हमें खुद सोचना होगा.
कि हम
जानकर भी अनजान
कब तक बने रहेंगे..
और खुद के लिए ही
कब तक जीते रहेंगे..?
-दीनदयाल शर्मा
कि हम
जानकर भी अनजान
कब तक बने रहेंगे..
और खुद के लिए ही
कब तक जीते रहेंगे..?
-दीनदयाल शर्मा
24 . 05 .2012
टाइम : 11 :06 PM
09414514666, 09509542303
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