प्रेम और सत्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं....मोहनदास कर्मचंद गांधी...........मुझे मित्रता की परिभाषा व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मैंने ऐसा मित्र पाया है जो मेरी ख़ामोशी को समझता है

Sunday, May 1, 2011

मातृ दिवस पर विशेष कविता - माँ / दीनदयाल शर्मा

माँ 
माँ तू आंगन मैं किलकारी,
माँ ममता की तुम फुलवारी।
सब पर छिड़के जान,
माँ तू बहुत महान।।

दुनिया का दरसन करवाया,
कैसे बात करें बतलाया।
दिया गुरु का ज्ञान,
माँ तू बहुत महान।।

मैं तेरी काया का टुकड़ा,
मुझको तेरा भाता मुखड़ा।
दिया है जीवनदान,
माँ तू बहुत महान।।

कैसे तेरा कर्ज चुकाऊं,
मैं तो अपना फर्ज निभाऊं।
तुझ पर मैं कुर्बान,
माँ तू बहुत महान।।
 
-दीनदयाल शर्मा,
बाल साहित्यकार
10/22 आर.एच.बी. कॉलोनी,
हनुमानगढ़ जंक्शन-335512
राजस्थान, भारत

  8 मई 2011 के लिए मातृ दिवस पर विशेष कविता। यह कविता मैंने 13/4/2011 को लिखी।

12 comments:

  1. माँ के प्रति सुन्दर भाव..सुन्दर कविता.

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  2. मातृ दिवस पर एक अनुपम भेंट है आप की यह कविता.सरल शब्दों में माँ की महिमा का वर्णन किया है .
    गूगल सर्च से इस कविता तक पहुंची हूँ.
    आभार.

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  3. आप सबका तहेदिल से धन्यवाद...इसी तरह हौसला बढ़ाते रहें ..और में लिखता रहूँ....

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  4. kya kavita likhi hai.SUPERB

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  5. BAHUT SUNDER BHAV PURN KAVITA LIKHI GAI H BADHAI

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  6. मातृ दिवस पर एक अनुपम भेंट है आप की यह कविता.सरल शब्दों में माँ की महिमा का वर्णन किया है .

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