प्रेम और सत्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं....मोहनदास कर्मचंद गांधी...........मुझे मित्रता की परिभाषा व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मैंने ऐसा मित्र पाया है जो मेरी ख़ामोशी को समझता है

Saturday, April 14, 2012

dadhi rakhoon ya nahin..? ek sujhaw apse..


dadhi rakhoon ya nahin..Pls. guide me..
apka sujhaw mera nirnya hoga..Thanks.

दाढ़ी के बारे में एक दोस्त ने सलाह देते हुए कहा....भाई, मेरी तो ये सलाह है कि  '' रखो तो तुम्हारी मर्जी..और ना रखो तो तुम्हारी मर्जी..''.  मैंने दोस्त से सलाह मांगी थी...मुझे दोस्त का सुझाव समझ में नहीं आया ...अब आप ही बताएं कि मेरा दोस्त जो सुझाव दे रहा है..वो आपके समझ में आ गया क्या..?

4 comments:

  1. आज 15/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति में) लिंक की गया हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. परिवर्तन प्रकृति का नियम है !

    ईश्वर के सिवाय सब परिवर्तन शील है !!

    इस सिद्धांत का पालन करना अच्छा है !!!

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  3. gyan.shringi@gmail.comApril 23, 2012 at 1:39 AM

    दीनदयाल जी,
    रखो न रखो आप की मर्जी
    आप तो अपने स्वयं के सर जी (Sir Ji)
    पर फिर भी कहता शर्मा जी
    रख लो - फिर कटवा लेना जी
    नमस्कार जी.

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  4. SIR YOU ARE LOOKING COOL IN BOTH STYLES

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