प्रेम और सत्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं....मोहनदास कर्मचंद गांधी...........मुझे मित्रता की परिभाषा व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मैंने ऐसा मित्र पाया है जो मेरी ख़ामोशी को समझता है

Saturday, May 29, 2010

दीनदयाल शर्मा की तीन शिशु कविताएं




हाथी

हाथी आया, हाथी आया
काला-काला हाथी आया
सूंड  हिलाता हाथी आया
कान हिलाता हाथी आया
कितना मोटा ताजा है ये
इसकी थुलथुल सी है काया।



कुत्ता

कुत्ता आया, कुत्ता आया
भौं-भौं करता कुत्ता आया
मेरे घर का है रखवाला 
हम बच्चों के मन को भाया
घर से बाहर घूमने जाऊं
बना रहे यह मेरा साया।



बकरी

बकरी आई, बकरी आई
में-में करती बकरी आई
चपर-चपर चरती है चारा
करती अपनी पेट भराई
पतली सी इसकी है काया
दिखती है हिरनी की माई।

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