प्रेम और सत्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं....मोहनदास कर्मचंद गांधी...........मुझे मित्रता की परिभाषा व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मैंने ऐसा मित्र पाया है जो मेरी ख़ामोशी को समझता है

Tuesday, July 6, 2010

दीनदयाल शर्मा की बाल कविता 'बारिश'

बारिश का मौसम / दीनदयाल शर्मा

बारिश का मौसम है आया।
हम बच्चों के मन को भाया।।

'छु' हो गई गरमी सारी।
मारें हम मिलकर किलकारी।।

कागज की हम नाव चलाएं।
छप-छप नाचें और नचाएं।।

मजा आ गया तगड़ा भारी।
आंखों में आ गई खुमारी।।

गरम पकौड़ी मिलकर खाएं।
चना चबीना खूब चबाएं।।

गरम चाय की चुस्की प्यारी।
मिट गई मन की खुश्की सारी।।

बारिश का हम लुत्फ उठाएं।
सब मिलकर बच्चे बन जाएं।।


16 comments:

  1. "बहुत सुन्दर कविता और आपकी प्यारी बिल्ली वाकई में प्यारी है..."

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  2. वाह....
    मज़ा आ गया
    गरम चाय की चुस्की
    और...
    गरम पकौड़ी

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  3. वैसे बाल काव्य की फुहारों से आप तो हर मौसम में ही बारिश करते रहते हैं. लेकिन इस बार
    अंतिम पंक्तियों में गरम पकोड़ियों को आपने चाय से अलग करके ठीक नहीं किया. गरम पकोड़ियों के साथ चना-चबेने को परोसना मुझ जैसे बड़े बच्चों को जँच नहीं रहा.

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  4. अच्छी अभिब्यक्ति |बधाई
    आशा

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  5. वाह ! बहुत सुन्दर कविता है.. :)

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  6. सुन्दर कविता..बधाई !!

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  7. हम तो पहले से ही बच्चे हैं और इसे पढ़ कर तो यकीन भी गया है

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  8. बच्चे बनेंगें, तभी बारिश भी होगी...लाजवाब गीत.

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  9. दीनदयाल जी..यहां आज ही कुछ बारिश हुई है...और आज ही आपके ब्लाग पर ये कविता पढी...मैं और आगे कह दुं..."मम्मी-पापा खूब चिल्लाएं...बार-बार हम बाहर जाएं...भीग-भीग कर वापस आएं...सावन का यूं मज़ा उठाएं"

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  10. बारिश का हम लुत्फ उठाएं।
    सब मिलकर बच्चे बन जाएं।।
    ...फिर तो बहुत मजा आयेगा...

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  11. sundar rachna.Deendayal ji meri baby ko bahut achchi lagi.

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  12. निराली है आपकी यह बाल-कविता..मस्त.
    _________________________
    अब ''बाल-दुनिया'' पर भी बच्चों की बातें, बच्चों के बनाये चित्र और रचनाएँ, उनके ब्लॉगों की बातें , बाल-मन को सहेजती बड़ों की रचनाएँ और भी बहुत कुछ....आपकी भी रचनाओं का स्वागत है.

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  13. bahut achi kavita h.

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  14. bahut sundar kavita hain jo sidhe man to chhoo leti hain.


    raj

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