प्रेम और सत्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं....मोहनदास कर्मचंद गांधी...........मुझे मित्रता की परिभाषा व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मैंने ऐसा मित्र पाया है जो मेरी ख़ामोशी को समझता है

Monday, November 24, 2014

सफाई की सौगंध / दीनदयाल शर्मा

हिन्दी बाल गीत-

सफाई की सौगंध / दीनदयाल शर्मा

आओ हम सब करें सफाई
रलमिल सारे बहना भाई

तन की मन की आस पास की
इधर उधर की आम खास की
जगह जगह जो लग गए जाले
उनकी है अब शामत आई.

गर हम सारे रखें सफाई
कण कण की यदि करें धुलाई
फिर सारे नीरोग रहेंगे
बीमारी में लगे न पाई..

पहला सुख नीरोगी काया
विद्वानों ने बात बताई
नित्य कर्म से जोड़ेंगे नाता
सबने मिल सौगंध है खाई..

- दीनदयाल शर्मा, 
बाल साहित्यकार

1 comment:

  1. सुन्दर प्रस्तुति...

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