प्रेम और सत्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं....मोहनदास कर्मचंद गांधी...........मुझे मित्रता की परिभाषा व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मैंने ऐसा मित्र पाया है जो मेरी ख़ामोशी को समझता है

Wednesday, March 7, 2012

होली / दीनदयाल शर्मा

होली

रंगों का त्यौंहार जब आए
टाबर टोल़ी के मन भाए।

नीला पीला लाल गुलाबी
रंग आपस में खूब रचाए।

रंग की भर मारें पिचकारी
'होली है' का शोर मचाए।

सूरत सबकी एक-सी लगती
इक दूजा पहचान न पाए।

बुरा न माने इस दिन कोई
सारा ही रंग में रच जाए।।

Monday, February 27, 2012

Sunday, January 1, 2012

नया साल


एक साल बाद फिर नया  साल आ गया..
काल  का पहिया देखो समय खा गया..

इस साल कितनी हस्तियाँ विदा हो गई.
यादें बन कर रह गई और जुदा हो गई.

काल चक्र का पहिया कभी रुकता नहीं.
कोई नहीं इससे बड़ा यह झुकता नहीं.

इसको समझ ले कोई वो इंसान होता है.
समय नकारने वाला सदा इंसान रोता है.

संकल्प लेकर उसको निभाना जरुरी है
वरना खुशियों की इंसान से बढ़ जाती दूरी है.

आओ ठहरें बतियाँयें दुःख सुख बाँट लें अपना.
किसी ने सच कर लिया , किसी का रह गया सपना.

बुजुर्गों बालकों से बात करके मन को हल्का हम
खुशियाँ दुगनी हो जाये और गम हो जाये कम.

फिर बात करने का भी पैसा लगे न  पाई यार.
जफियां पा के दिल को दे दे तूं तसल्ली दावेदार.

फिर ना रोग कोई घेरे , ना तनाव आएगा.
बी पी शुगर और दिल का डर भी मिट जायेगा..

कितने फायदे की बात है कुछ बात करने में 
चुप्पी तोड़ दे झट तूं , क्या रखा है डरने में ...

स्वस्थ जीना भी जीना है, बीमारी जिंदगी है खाक,
अमर होना है तो जी ले चाहे बन जाना फिर तूं राख़.

कितना जी लिया तूं, कोई मायना नहीं,
कैसे जी लिया खुद को , ज़िक्र होगा तेरा कहीं ,

खुला दिल भी छोड़ दे, और दिमाग को भी तुम 
फिर देखना मत उलझनों में खुद को कभी भी गुम

बहते झरने भांति, सदा बहते ही रहना तुम 
फिर देखना तूं , हारी बजी जीत जायेगा..

नया अब साल आया है, नया फिर साल आयेगा..
तेरा जुनून है जिंदा..सदा खुशियाँ ही पायेगा..


-दीनदयाल शर्मा, 1 -1 -2012  



Tuesday, December 13, 2011

सर्दी / दीनदयाल शर्मा






सर्दी आई सर्दी आई
ओढ़ें कम्बल और रजाई
ज्यों-ज्यों सर्दी बढ़ती जाए
कपड़ों की हम करें लदाई।

मिलजुल सारे आग तापते
रात-रात भर करें हथाई।
भाँति-भाँति के लड्डू खाकर
सर्दी पर हम करें चढ़ाई।

सूरज निकला धूप सुहाई
सर्दी की अब शामत आई।
फाल्गुन आया होली आई
सर्दी की हम करें विदाई।।

-दीनदयाल शर्मा

Sunday, December 4, 2011

हार्दिक श्रद्धांजलि


हार्दिक श्रद्धांजलि 

देवानंद हीरो थे जगत के
हरदम सदाबहार 
बच्चे , बूढ़े और जवां ने 
दिया था उनको प्यार

फ़िल्में उनको रखेंगी जिंदा 
बनी है बेशुमार 
छोड़ देह को चले गये वे
लेंगे नव अवतार..

दीनदयाल शर्मा
बाल साहित्यकार 



हिन्दी में लिखिए